धार्मिक लोग अक्सर कहते हैं:
“यह ब्रह्मांड और जीवन इतने जटिल (Complex) हैं कि इन्हें किसी बुद्धिमान रचयिता (God) ने ही बनाया होगा।”
डॉकिन्स इस तर्क पर सवाल उठाते हैं।
वे पूछते हैं:
अगर हर जटिल चीज़ को किसी निर्माता की ज़रूरत है, तो फिर भगवान को किसने बनाया?
यदि आप कहें कि भगवान को किसी ने नहीं बनाया और वे हमेशा से हैं, तो फिर यही बात ब्रह्मांड के बारे में भी कही जा सकती है।
Infinite Regress (अनंत क्रम)
अगर हर चीज़ के लिए कोई निर्माता चाहिए, तो प्रश्न कभी खत्म नहीं होगा।
- इंसान को भगवान ने बनाया।
- भगवान को किसने बनाया?
- उस निर्माता को किसने बनाया?
- उसे किसने बनाया?
यह सिलसिला अनंत तक चलता रहेगा। इसे Infinite Regress (अनंत प्रतिगमन) कहते हैं।
इसलिए भगवान को मान लेना वास्तव में समस्या का समाधान नहीं करता, बल्कि एक और बड़ा प्रश्न खड़ा कर देता है।
भगवान स्वयं सबसे जटिल सत्ता होंगे
यदि भगवान ने पूरे ब्रह्मांड, सभी जीवों और प्रकृति के नियमों की रचना की है, तो वे स्वयं अत्यंत जटिल (Complex) होंगे।
अब सवाल है—
अगर जटिलता के लिए निर्माता आवश्यक है, तो सबसे अधिक जटिल भगवान के लिए तो और भी अधिक निर्माता की आवश्यकता होगी।
यानी,
जिस समस्या को हल करने के लिए भगवान को लाया गया था, वही समस्या भगवान पर और भी अधिक लागू हो जाती है।
Boeing 747 का उदाहरण
डॉकिन्स एक प्रसिद्ध उदाहरण देते हैं।
कल्पना कीजिए—
एक कबाड़खाना (Scrapyard) है।
उसमें एक तूफ़ान आता है।
क्या उस तूफ़ान से अपने-आप एक पूरा Boeing 747 विमान बन जाएगा?
उत्तर है—
लगभग असंभव।
इसी प्रकार कुछ लोग कहते हैं कि:
“जीवन इतना जटिल है कि वह बिना किसी बुद्धिमान डिज़ाइनर के नहीं बन सकता।”
लेकिन यही तर्क भगवान के विरुद्ध जाता है
यदि जटिल जीवन अपने-आप नहीं बन सकता,
तो उससे भी अधिक जटिल भगवान अपने-आप कैसे हो सकते हैं?
यानी,
यदि जीवन के लिए डिज़ाइनर चाहिए,
तो उस डिज़ाइनर के लिए उससे भी बड़ा डिज़ाइनर चाहिए।
इस तरह समस्या और कठिन हो जाती है।
इसी कारण डॉकिन्स कहते हैं—
भगवान स्वयं “Ultimate Boeing 747” हैं।
अर्थात सबसे असंभव वस्तु।
Darwin की Theory इसका उत्तर कैसे देती है?
Charles Darwin ने बताया कि जीवन अचानक नहीं बना।
यह करोड़ों वर्षों में धीरे-धीरे विकसित हुआ।
इसे Natural Selection (प्राकृतिक चयन) कहते हैं।
Natural Selection क्या है?
यह पूरी तरह “Random” (सिर्फ़ संयोग) नहीं है।
इसमें दो चरण होते हैं—
- Random Mutation (यादृच्छिक परिवर्तन) होते हैं।
- Natural Selection (प्राकृतिक चयन) उन परिवर्तनों में से केवल लाभदायक परिवर्तनों को आगे बढ़ने देता है।
यानी,
हर छोटी सफलता अगली सफलता की नींव बनती जाती है।
इस प्रकार धीरे-धीरे अत्यधिक जटिल जीव विकसित हो जाते हैं।
Creationists कहाँ गलती करते हैं?
सृष्टिवादी (Creationists) अक्सर कहते हैं—
“Evolution सिर्फ़ Chance (संयोग) है।”
लेकिन यह सही नहीं है।
Mutation संयोग हो सकता है,
पर Selection संयोग नहीं है।
प्रकृति लगातार उन जीवों को चुनती है जो बेहतर ढंग से जीवित रह सकते हैं और प्रजनन कर सकते हैं।
इसलिए Evolution एक क्रमिक (Step-by-Step) प्रक्रिया है, न कि एक ही बार में हुई घटना।
Darwin ने सोचने का तरीका बदल दिया
Darwin की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल जीवन की उत्पत्ति समझाना नहीं थी।
उन्होंने दिखाया कि—
जटिलता बिना किसी बुद्धिमान योजनाकार के भी धीरे-धीरे विकसित हो सकती है।
यही कारण है कि कई लोगों को Evolution का सिद्धांत धार्मिक व्याख्याओं की तुलना में अधिक तार्किक लगा।
Douglas Adams का उदाहरण
Douglas Adams ने कहा था कि Evolution को समझने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि जीवन की जटिलता को समझाने के लिए भगवान की आवश्यकता नहीं रह जाती।
उन्हें प्राकृतिक चयन की प्रक्रिया धार्मिक व्याख्या की अपेक्षा अधिक स्पष्ट और सरल लगी।