भारतीय संत एवं गुरु
- कृष्ण: ओशो कृष्ण को बहुआयामी (multi-dimensional) मानते थे — पूर्ण पुरुष, प्रेमी, योद्धा, दार्शनिक। गीता दर्शन और कृष्ण स्मृति जैसी श्रृंखलाओं में उन्होंने कृष्ण को “नव-संन्यास” का प्रतीक बताया। कृष्ण जीवन का आनंद, कर्मयोग और भक्ति का संदेश देते हैं।
- गौतम बुद्ध: ओशो के सबसे प्रिय। बुद्ध की शून्यता, साक्षी भाव और विद्रोह की सराहना। एस धम्मो सनंतनो और धम्मपद पर सैकड़ों प्रवचन। बुद्ध को “सबसे वैज्ञानिक बुद्ध” कहा।
- महावीर: जैन परंपरा से होने के कारण ओशो ने उन्हें कर्तव्यवश बोला। उन्हें गणितीय, कठोर और गणना-आधारित माना, लेकिन पूर्ण enlightened स्वीकार किया (महावीर वाणी)।
- पतंजलि: योग के वैज्ञानिक मार्ग के प्रवर्तक। पतंजलि योग सूत्र पर गहन प्रवचन। ओशो ने योग को ध्यान की प्रक्रिया के रूप में समझाया।
- शंकराचार्य: अद्वैत वेदांत के महान दार्शनिक। ओशो ने उनकी माया और ब्रह्म की व्याख्या को सराहा।
- गोरखनाथ: ओशो ने उन्हें भारत की आध्यात्मिक परंपरा की आधारशिला माना। नाथ संप्रदाय, हठयोग और तंत्र की परंपरा को उन्होंने बहुत महत्व दिया। गोरखनाथ को योग और तंत्र का महान गुरु कहा।
- कबीर: अत्यंत प्रिय। “पूर्व का ईसा” कहा। कबीर की सरलता, दोहे और गुरु-भक्ति को बहुत पसंद किया (The Divine Melody, Ecstasy: The Forgotten Language)।
- नानक: सिख गुरु। The True Name (जपुजी साहिब पर) प्रवचन। एकता, नाम-सिमरण और सामाजिक समानता पर जोर।
- मीराबाई: भक्ति की परम उदाहरण। उनकी प्रेम-दीवानगी और कृष्ण-भक्ति को ओशो ने बार-बार उद्धृत किया।
- रामकृष्ण परमहंस: विविध मार्गों (सभी धर्म) के अनुभव वाले महान mystic। ओशो ने उनकी माँ काली के प्रति समर्पण और सार्वभौमिकता को सराहा।
- रमण महर्षि: “Who am I?” की आत्म-जांच की विधि को ओशो ने बहुत महत्व दिया। शांत, मौन और प्रत्यक्ष अनुभव वाले गुरु।
विश्व के महान विचारक एवं रहस्यवादी
- जॉर्ज गुरजिएफ: ओशो ने गुरजिएफ को “जादूगर” (magician) कहा। उनकी “Fourth Way” और work on mechanical man को सराहा, लेकिन कुछ सीमाएँ भी बताईं।
- जिद्दू कृष्णमूर्ति: ओशो के समकालीन। उनकी “no authority”, psychological revolution और freedom की बात को बहुत पसंद किया, हालांकि दोनों के दृष्टिकोण में सूक्ष्म अंतर थे।
- लाओ त्सू: ओशो का अत्यंत प्रिय। Tao Te Ching पर Tao: The Three Treasures। लाओ त्सू की सरलता, निष्क्रियता (wu wei) और feminine approach को आदर्श माना।
- जीसस (ईसा मसीह): प्रेम, क्रॉस और compassion पर गहरा सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण। उनकी उदासी को थोड़ा भारी माना।
- सुकरात: पश्चिमी दर्शन का मूल। “Know thyself” को ओशो ने बार-बार दोहराया।
- पाइथागोरस: रहस्यवादी गणितज्ञ। संगीत, संख्या और आध्यात्मिक विद्यालय की परंपरा।
- हेराक्लिटस: “सब कुछ बहता है” (everything flows) — परिवर्तन के दार्शनिक। ओशो को बहुत पसंद।
- फ्रेडरिक नीत्शे: “God is dead” और Übermensch। ओशो ने उनकी विद्रोही ऊर्जा को सराहा।
- ख़लील जिब्रान: कवि-रहस्यवादी। The Prophet पर ओशो ने चर्चा की।
- रूमी: सूफी कवि। प्रेम, नृत्य और विलय की परंपरा। ओशो ने सूफियों पर कई श्रृंखलाएँ दीं।
- बोधिधर्म: ज़ेन बौद्ध धर्म के संस्थापक। क्रांतिकारी, सीधे और कठोर शैली। ओशो ने ज़ेन पर बहुत कुछ कहा।
- ज़रथुस्त्र (फ्रेडरिक नीत्शे)
- फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की
- चुआंग त्ज़ु
- ओमर खय्याम
- पी. डी. उसपेन्स्की
- डी. टी. सुज़ुकी
- हेरमन हेस्से
- अल्बर्ट आइंस्टीन
- कार्ल मार्क्स
- सिगमंड फ्रायड
- मार्टिन बूबर
- बर्ट्रेंड रसेल
ओशो द्वारा चर्चित अन्य विचारक एवं रहस्यवादी
इनके अलावा, ओशो ने महात्मा गांधी, नागार्जुन, शंकराचार्य, दादू, मलूकदास, सहजोबाई, चाँदीदास, दयाबाई, लल्लेश्वरी (लल्ला), तुलसीदास (गीत गोविंद के संदर्भ में), मीरा, कबीर, नानक, गुरु ग्रंथ साहिब, शिव, कृष्ण, और रामानुज जैसे अनेक भारतीय संतों, कवियों और दार्शनिकों पर भी विस्तार से चर्चा की है। एक प्रसिद्ध प्रसंग में, उन्होंने गोरखनाथ को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की आधारशिला बताया था।