मिशेल फूको (1926-1984) फ्रांसीसी दार्शनिक, इतिहासकार, समाजशास्त्री और विचारक थे। वे 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली और विवादास्पद दार्शनिकों में से एक हैं।
वे पोस्ट-स्ट्रक्चरलिज्म और पोस्टमॉडर्निज्म के प्रमुख प्रतिनिधि माने जाते हैं। नीत्शे से बहुत प्रभावित थे।
मुख्य विचार (Key Ideas):
- शक्ति (Power)
- शक्ति केवल राज्य या सरकार में नहीं होती, बल्कि समाज के हर स्तर पर फैली हुई है।
- “शक्ति सर्वव्यापी है” — यह ज्ञान, भाषा, संस्थाओं और संबंधों के माध्यम से काम करती है।
- शक्ति और ज्ञान एक-दूसरे से जुड़े हैं: “ज्ञान = शक्ति” (Power/Knowledge)।
- ज्ञान का पुरातत्व (Archaeology of Knowledge)
- फूको ने विभिन्न युगों में ज्ञान कैसे बनता और बदलता है, इसका अध्ययन किया।
- हर युग की अपनी “Episteme” (ज्ञान व्यवस्था) होती है।
- पागलपन, चिकित्सा और जेल
- Madness and Civilization: पागलपन को समाज ने “अन्य” (Other) बनाकर अलग किया।
- The Birth of the Clinic: आधुनिक चिकित्सा कैसे शक्ति का माध्यम बनी।
- Discipline and Punish: जेल, स्कूल, अस्पताल, फैक्ट्री — ये सब “अनुशासन” (Discipline) के माध्यम से शरीर और मन को नियंत्रित करते हैं।
- जीवनी-शक्ति (Biopower)
- आधुनिक राज्य न केवल लोगों को दंडित करता है, बल्कि उनकी पूरी जीवन-शैली (जन्म, मृत्यु, स्वास्थ्य, यौनिकता) को नियंत्रित करता है।
- यौनिकता का इतिहास (The History of Sexuality)
- यौनिकता प्राकृतिक नहीं, बल्कि सामाजिक-ऐतिहासिक निर्माण है।
- “समलिंगता” जैसी श्रेणियाँ भी शक्ति द्वारा बनाई गई हैं।
- विषय (Subject)
- मनुष्य स्वतंत्र विषय नहीं है। वह शक्ति और ज्ञान के जाल में बना हुआ है।
प्रमुख रचनाएँ:
- Madness and Civilization (1961)
- The Order of Things (1966)
- The Archaeology of Knowledge (1969)
- Discipline and Punish (1975)
- The History of Sexuality (3 खंड)