Deontology (डिऑन्टोलॉजी) एक नैतिक (Ethics) सिद्धांत है, जिसके अनुसार किसी कार्य की सही या गलत होने का निर्णय उसके परिणामों से नहीं, बल्कि उसके नैतिक कर्तव्य (Duty) और नियमों के आधार पर किया जाता है।
सरल शब्दों में:
डिऑन्टोलॉजी कहती है कि “जो काम नैतिक रूप से सही है, उसे करना चाहिए, चाहे उसका परिणाम कुछ भी हो।”
उदाहरण:
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने आपसे पूछा कि उसका दोस्त कहाँ छिपा है, और आप जानते हैं कि वह व्यक्ति उसे नुकसान पहुँचाना चाहता है।
- डिऑन्टोलॉजी के अनुसार झूठ बोलना गलत है, इसलिए आपको सच बताना चाहिए क्योंकि सत्य बोलना आपका नैतिक कर्तव्य है।
- भले ही सच बताने से बुरा परिणाम क्यों न निकले।
प्रमुख विचारक:
Immanuel Kant ने इस सिद्धांत को सबसे अधिक विकसित किया। उनके अनुसार मनुष्य को हमेशा नैतिक नियमों और कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
मुख्य विशेषताएँ:
- कर्तव्य (Duty) पर जोर।
- नैतिक नियमों का पालन।
- परिणामों की अपेक्षा कार्य की नैतिकता अधिक महत्वपूर्ण।
- सभी लोगों के लिए समान नैतिक मानदंड।
एक पंक्ति में:
डिऑन्टोलॉजी वह नैतिक सिद्धांत है जो कहता है कि सही कार्य वही है जो नैतिक कर्तव्य और नियमों के अनुसार किया जाए, चाहे उसके परिणाम अच्छे हों या बुरे।