1. “पैंग्लॉस” (Pangloss) – दार्शनिक ‘लाइबनिज़’ को दर्शाता है
- कौन था: लाइबनिज़ (Leibniz) – एक जर्मन दार्शनिक जो कहता था “यह सबसे अच्छी संभावित दुनिया है” (Optimism)।
- वोल्टेयर ने क्या किया: उन्होंने ‘कैंडाइड’ किताब में पैंग्लॉस नाम का एक बेवकूफ, मोटा, हँसी-पात्र शिक्षक बनाया।
- कैसे दिखाया: पैंग्लॉस को बीमारियाँ, भूकंप, गुलामी – सब झेलनी पड़ती है, फिर भी वह कहता रहता है “सब ठीक है”।
- संदेश: वोल्टेयर ने दिखाया कि लाइबनिज़ की ‘आशावाद’ की बातें उन लोगों के लिए हैं जिन्होंने कभी दुख नहीं देखा।
2. “कैंडाइड” (Candide) – ‘भोला-भाला आम इंसान’ को दर्शाता है
- किसको दिखाया: कैंडाइड कोई खास नहीं – वह हर वह सामान्य व्यक्ति है जो दुनिया की सच्चाई से अनजान है।
- कैसे दिखाया: वह हर जगह भटकता है – युद्ध, बलात्कार, लूटपाट – सब देखता है, और अंत में सीखता है कि दार्शनिक झगड़ों से कोई फायदा नहीं।
- संदेश: आम आदमी अगर खुद सोचना शुरू कर दे, तो उसे कोई बेवकूफ नहीं बना सकता।
3. “मार्टिन” (Martin) – दार्शनिक ‘पास्कल’ और ‘स्पिनोज़ा’ को दर्शाता है
- कौन थे: ब्लेज़ पास्कल – जो कहता था कि दुनिया पाप और दुख से भरी है।
- वोल्टेयर ने क्या किया: मार्टिन एक उदास, निराशावादी (Pessimist) पात्र है – जो हर जगह केवल बुराई देखता है।
- संदेश: वोल्टेयर दोनों (आशावाद और निराशावाद) का मज़ाक उड़ाते हैं – कहते हैं कि न तो सब अच्छा है, न सब बुरा – बस अपना काम करो।
4. “ईश्वर/चर्च” को ‘बेतुके पुजारी’ और ‘इंक्विज़िशन’ से दर्शाया
- किसको दिखाया: कैथोलिक चर्च और पोप को।
- कैसे: उनकी किताबों में पुजारी हमेशा लालची, महिलाओं का पीछा करने वाले, और झूठे चमत्कार दिखाने वाले होते हैं।
- संदेश: चर्च ने ईश्वर के नाम पर जो अत्याचार किए – वे सब धर्म नहीं, बल्कि ‘सत्ता का खेल’ थे।
5. “राजा फ्रेडरिक” (प्रशिया का राजा) – ‘बड़बोले तानाशाह’ के रूप में
- कौन था: फ्रेडरिक द ग्रेट – जिसने वोल्टेयर को अपने दरबार में बुलाया, लेकिन फिर उसे अपमानित किया।
- वोल्टेयर ने क्या किया: उन्होंने राजा को “सोलोमन” नाम के एक अहंकारी, कविता-लिखने वाले मूर्ख राजा के रूप में दिखाया – जो अपनी बुद्धि पर इतराता है, लेकिन असली काम कुछ नहीं करता।
- संदेश: ताज पहने बुद्धिजीवी सबसे खतरनाक होते हैं – क्योंकि वे अपनी बुद्धि से दूसरों पर राज करते हैं।
6. “महोदया” (Pococurante) – ‘अंग्रेज़ी दार्शनिकों’ को दर्शाता है
- किसको दिखाया: उन अंग्रेज़ दार्शनिकों को जो हर चीज़ को नकारते थे (Sceptics)।
- कैसे: इस पात्र को वोल्टेयर ने हर किताब, हर कला, हर संगीत को बेकार कहने वाला दिखाया।
- संदेश: अति-नकारात्मकता भी उतनी ही मूर्खता है जितनी अति-आशावाद।
7. “यहूदी व्यापारी” और “जेसुइट पादरी” – ‘पूँजीवादी लालच’ और ‘छल’ को
- किसको दिखाया: उन पुजारियों और व्यापारियों को जो गरीबों का खून चूसते थे।
- कैसे: वोल्टेयर ने उन्हें पैसे के लिए कुछ भी करने वाला, बिना नैतिकता के दिखाया।
- संदेश: धार्मिक आवरण में लालच – यह सबसे बड़ा पाखंड है।
8. “एल्डोरैडो” (सोने का शहर) – ‘आदर्श समाज’ को दर्शाता है
- किसको दिखाया: उन्होंने एक काल्पनिक शहर बनाया जहाँ:
- कोई पुजारी नहीं,
- कोई जेल नहीं,
- कोई झगड़ा नहीं,
- और वहाँ के लोग सिर्फ ‘धन्यवाद’ कहते हैं, ‘प्रार्थना’ नहीं।
- संदेश: आदर्श समाज संभव है – लेकिन वहाँ धर्म और सत्ता नहीं होनी चाहिए – केवल तर्क और परस्पर सम्मान होना चाहिए।
1. ईश्वर में उनका अजीब विश्वास (Deism)
वे नास्तिक (नास्तिक) नहीं थे, बल्कि “देववादी” (Deist) थे।
- वे मानते थे कि ईश्वर ने इस ब्रह्मांड को घड़ी की तरह बनाया – उसे चलाकर छोड़ दिया, और अब वह हस्तक्षेप नहीं करता।
- वे चर्च के “चमत्कारों” का मज़ाक उड़ाते थे, लेकिन कहते थे “अगर ईश्वर न होता, तो उसे खोजना पड़ता।”
2. बुराई की समस्या (Problem of Evil) पर उनका गहरा दुःख
वोल्टेयर ने 1755 का लिस्बन भूकंप देखा – जिसमें 30,000 लोग मारे गए।
- इसके बाद उन्होंने कड़वाहट में लिखा – “अगर ईश्वर सर्वशक्तिमान और दयालु है, तो वह इतनी पीड़ा क्यों देता है?”
- उन्होंने “आशावाद” (Optimism) का मज़ाक उड़ाया – उन्होंने कहा कि लाइबनिज़ का यह कहना कि “यह सबसे अच्छी संभावित दुनिया है”, बेवकूफी है।
3. उनका ‘कैंडाइड’ – सबसे तीखा व्यंग्य
उनकी सबसे मशहूर किताब “कैंडाइड” (Candide) में:
- हीरो (कैंडाइड) दुनिया भर में भटकता है – युद्ध, बलात्कार, भूकंप, बीमारी – सब देखता है।
- हर जगह उसे “सब कुछ ठीक है” कहने वाले दार्शनिक (पैंग्लॉस) मिलते हैं।
- अंत में कैंडाइड कहता है – “हमें अपने बगीचे की खेती करनी चाहिए” – यानी **दुनिया को सुधारने से बेहतर है कि अपने आस-पास की छोटी-छोटी अच्छाइयाँ करें।
4. धर्मांधता (Fanaticism) को उन्होंने ‘महापाप’ माना
उनका प्रसिद्ध नारा था – “जो लोग तुम्हें अलग-अलग विचारों के कारण मार सकते हैं, वे राक्षस हैं।”
- उन्होंने कैलास (Jean Calas) मामले में हस्तक्षेप किया – एक प्रोटेस्टेंट व्यापारी को कैथोलिकों ने झूठे आरोप में मार डाला – वोल्टेयर ने 3 साल लड़कर उसे बरी करवाया।
5. उनका ‘हास्य’ (Humour) – लोगों को हँसकर जगाना
वे कहते थे – “जो बात आँसू नहीं सुखा सकती, वह हँसी सुखा देती है।”
- उन्होंने कभी गंभीरता (Seriousness) नहीं अपनाई – क्योंकि वे जानते थे कि हँसी के सामने तानाशाही टिक नहीं सकती।
6. उन्होंने इतिहास को ‘झूठ’ करार दिया
उन्होंने लिखा – “इतिहास केवल उन अपराधों और दुर्घटनाओं का समूह है, जिन्हें विजेताओं ने लिखा है।”
- यानी उन्होंने “आधिकारिक इतिहास” पर भी सवाल उठाया – कहा कि असली सच्चाई आम लोगों के जीवन में है।
7. वे ‘अकेले’ थे – राजा भी उनसे डरते थे
- फ्रांस के राजा ने उन्हें देश से निकाल दिया, चर्च ने उनकी किताबें जला दीं।
- लेकिन वे हँसते रहे और पलायन करते रहे – स्विट्ज़रलैंड, इंग्लैंड, प्रशिया – और हर जगह लिखते रहे।
8. उनका अंतिम संदेश (मृत्यु से पहले)
84 साल की उम्र में जब उनसे कहा गया – “शैतान को त्यागो!” तो उन्होंने मुस्कुराकर कहा –
“अभी नया दुश्मन बनाने का समय नहीं है।”