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1. तत्वमीमांसा (Metaphysics) – ‘वास्तविकता’ क्या है?

  • द्वैतवाद (Dualism): मानसिक (चेतना) और भौतिक (शरीर/पदार्थ) दो अलग-अलग तत्व हैं।
  • भौतिकवाद (Materialism): केवल पदार्थ (Matter) ही वास्तविक है; चेतना उसका एक उपोत्पाद है।
  • आदर्शवाद (Idealism): केवल चेतना/विचार ही वास्तविक हैं; भौतिक जगत मन का एक प्रक्षेपण है।
  • एकत्ववाद (Monism): सारी सृष्टि एक ही मूल तत्व (या तो पदार्थ या चेतना) से बनी है। (द्वैतवाद का उलट)
  • भौतिकतावाद (Physicalism): भौतिकवाद का कड़ा रूप—हर चीज़ भौतिकी/रसायन से समझाई जा सकती है।
  • बहुलवाद (Pluralism): वास्तविकता कई अलग-अलग मूल तत्वों (जैसे—मन, पदार्थ, और ‘स्वरूप’) से बनी है।
  • एकांतवाद/अहंवाद (Solipsism): केवल ‘मेरा अपना मन’ ही निश्चित रूप से अस्तित्व में है; बाकी दुनिया और लोग मेरी कल्पना हो सकते हैं।
  • वर्तमानवाद (Presentism): केवल ‘वर्तमान क्षण’ ही वास्तविक है; अतीत मर चुका, भविष्य अभी पैदा नहीं हुआ।
  • शाश्वतवाद (Eternalism): भूत, वर्तमान और भविष्य—तीनों समान रूप से वास्तविक हैं। समय एक आयाम (Dimension) मात्र है।

2. नीतिशास्त्र (Ethics) – ‘अच्छा’ क्या है? कैसे जिएँ?

  • संयमवाद/स्टोइसिज्म (Stoicism): भावनाओं पर काबू, विवेक, और जो आपके नियंत्रण में नहीं, उसे स्वीकार करना—यही सुखी जीवन है।
  • सुखवाद (Epicureanism): बुद्धिमानी से सुख (शारीरिक पीड़ा से मुक्ति + मानसिक शांति) ही जीवन का लक्ष्य है।
  • सद्गुण नीतिशास्त्र (Virtue Ethics): नियमों या परिणामों पर ध्यान नहीं, बल्कि साहस, ईमानदारी, बुद्धि जैसे सद्गुण विकसित करना नैतिकता है।
  • अहंवाद (Egoism): सभी नैतिक कर्मों की जड़ ‘स्वार्थ’ है—आपको अपने हित में ही काम करना चाहिए।
  • परोपकारिता (Altruism): अहंवाद का उलट—दूसरों के कल्याण के लिए कर्म करना ही सर्वोच्च नैतिक कर्तव्य है।
  • सुखवाद (Hedonism): केवल ‘सुख’ (और दुख का अभाव) ही अंतिम रूप से अच्छा है और जीवन का लक्ष्य है।
  • पूर्णतावाद (Perfectionism): नैतिकता का मतलब है—अपनी मानवीय क्षमता को पूरी तरह विकसित करना।
  • सापेक्षवाद (Relativism): नैतिक सत्य निरपेक्ष नहीं; वे संस्कृति, समाज या व्यक्ति पर निर्भर हैं।

3. ज्ञानमीमांसा (Epistemology) – हम ‘कैसे’ जानते हैं?

  • अनुभववाद (Empiricism): सारा ज्ञान इंद्रियों (आँख, कान, स्पर्श) के अनुभव से आता है। (तर्कवाद का उलट)
  • तर्कवाद (Rationalism): ज्ञान का मूल स्रोत ‘तर्क’ और ‘बुद्धि’ है, न कि इंद्रियाँ।
  • संशयवाद (Skepticism): हर बात पर शक करना—दार्शनिक संशयवाद कहता है कि ‘पूर्ण निश्चित ज्ञान’ असंभव है।
  • रचनावाद (Constructivism): मनुष्य ज्ञान और अर्थ को अपने सामाजिक अनुभवों से स्वयं ‘रचता’ है, प्राकृतिक रूप से खोजता नहीं।
  • घटनाविज्ञान (Phenomenology): बाहरी दुनिया पर नहीं, बल्कि व्यक्तिपरक अनुभव (किसी चीज़ को देखने/सोचने का भाव) पर केंद्रित है।

4. राजनीतिक दर्शन (Political Philosophy) – समाज कैसा हो?

  • उदारवाद (Liberalism): व्यक्तिगत स्वतंत्रता, समानता और जनमत पर आधारित राजनीति।
  • सामूहिकवाद (Collectivism): व्यक्ति से बड़ा समूह (समाज/राज्य) है—उसका हित प्राथमिक है।
  • अराजकतावाद (Anarchism): सभी प्रकार के राज्य/शासन का विरोध—स्वैच्छिक, बिना सरकार वाला समाज चाहिए।
  • सांप्रदायिकतावाद (Communitarianism): व्यक्ति की पहचान और नैतिकता उसके समुदाय से बनती है—समुदाय के अधिकार व्यक्ति से कभी-कभी ज्यादा होते हैं।
  • मार्क्सवाद (Marxism): इतिहास वर्ग-संघर्ष है—पूँजीवाद को समाप्त कर वर्गहीन समाज स्थापित करना लक्ष्य है।

5. अस्तित्ववादी एवं धार्मिक शब्द (Existential & Theological) – आपकी मूल लिस्ट का विस्तार

  • देववाद (Deism): ईश्वर ने ब्रह्मांड बनाया, पर अब वह इसमें हस्तक्षेप नहीं करता (घड़ीसाज़ की तरह)।
  • अस्तित्ववाद (Existentialism): मनुष्य पहले अस्तित्व में आता है, फिर अपने कर्मों से अपना सार/अर्थ स्वयं बनाता है—कोई पूर्व-निर्धारित उद्देश्य नहीं।
  • शून्यवाद (Nihilism): जीवन का कोई अर्थ, मूल्य या सत्य नहीं है—सब व्यर्थ है।
  • विसंगतिवाद/अस्पष्टतावाद (Absurdism): मनुष्य अर्थ ढूँढता है, पर ब्रह्मांड निष्प्रयोजन (अर्थहीन) है—इस विरोधाभास को स्वीकार करो और जियो (Camus)।
  • मानवतावाद (Humanism): केंद्र में मानव है—ईश्वर या धर्म की आवश्यकता नहीं; मानवीय तर्क, नैतिकता और करुणा ही काफी हैं।
  • व्यावहारिकतावाद (Pragmatism): कोई भी विचार/सिद्धांत तब तक सत्य नहीं, जब तक उसका व्यावहारिक परिणाम या ‘काम का’ न हो।
  • नियतिवाद (Determinism): हर घटना (आपके विचार और कर्म भी) पूर्व कारणों से पूरी तरह निर्धारित है—स्वतंत्र इच्छा एक भ्रम है।
  • भाग्यवाद (Fatalism): नियतिवाद से भी आगे—सब कुछ भाग्य से पहले से तय है, चाहे आप कुछ भी करें, उससे बदलाव नहीं आएगा।
  • आस्तिकवाद (Theism): एक या अनेक ईश्वरों में विश्वास (जो सक्रिय रूप से दुनिया में हस्तक्षेप करते हैं)।
  • अज्ञेयवाद (Agnosticism): यह मानना कि ईश्वर का अस्तित्व अज्ञात है और संभवतः जाना नहीं जा सकता।
  • सर्वेश्वरवाद (Pantheism): ईश्वर ही ब्रह्मांड है—प्रकृति और ईश्वर एक हैं (स्पिनोज़ा)।
  • सर्वात्मवाद (Panentheism): ईश्वर ब्रह्मांड में व्याप्त है, परन्तु ब्रह्मांड से परे भी विद्यमान है।

6. दो और बेहद दिलचस्प शब्द (Bonus)

  • उत्तर-आधुनिकतावाद (Postmodernism): किसी भी ‘बड़े कथानक’ (जैसे—विज्ञान, प्रगति, इतिहास) पर विश्वास नहीं; सत्य खंडित, विडंबनापूर्ण और परिवर्तनशील है।
  • मौनवाद/शांतवाद (Quietism): दुनिया को बदलने की कोशिश मत करो; बल्कि आंतरिक शांति, स्वीकृति और निष्क्रियता (बिना संघर्ष के) को अपनाओ—यह भारतीय अद्वैत और ताओवाद से मेल खाता है।


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