सापेक्षवाद एक नैतिक सिद्धांत है, जिसके अनुसार सही और गलत का कोई सार्वभौमिक (Universal) मानदंड नहीं होता। नैतिक मूल्य संस्कृति, समय, समाज और परिस्थितियों के अनुसार बदल सकते हैं।
आधार
- नैतिकता सभी लोगों और सभी समाजों के लिए एक जैसी नहीं होती।
- जो एक संस्कृति या समाज में सही माना जाता है, वह दूसरे में गलत माना जा सकता है।
- नैतिक निर्णय संदर्भ (Context) पर निर्भर करते हैं।
सही (Right)
वह कार्य जो किसी विशेष संस्कृति, समाज, समय या परिस्थिति के मानदंडों के अनुसार उचित माना जाए।
गलत (Wrong)
वह कार्य जो उस संस्कृति, समाज या परिस्थिति के मानदंडों के विरुद्ध हो।
उदाहरण
- कुछ देशों में अभिवादन के लिए हाथ मिलाना सामान्य है, जबकि कुछ संस्कृतियों में नमस्ते करना अधिक उचित माना जाता है।
- किसी समाज में कोई प्रथा स्वीकार्य हो सकती है, जबकि दूसरे समाज में वही प्रथा अनुचित मानी जा सकती है।
मुख्य विशेषताएँ
- नैतिकता संदर्भ-आधारित होती है।
- विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं का सम्मान।
- सार्वभौमिक नैतिक नियमों का विरोध।
- समय और परिस्थितियों के अनुसार नैतिक मानदंड बदल सकते हैं।
आलोचनाएँ
- यदि कोई सार्वभौमिक नैतिक मानदंड नहीं है, तो अन्यायपूर्ण प्रथाओं की आलोचना करना कठिन हो सकता है।
- यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि अलग-अलग नैतिक दृष्टिकोणों में कौन-सा बेहतर है।
एक पंक्ति में
सापेक्षवाद के अनुसार सही और गलत का निर्णय संस्कृति, समय, समाज और परिस्थिति के अनुसार बदलता है; कोई एक नैतिक नियम सभी पर समान रूप से लागू नहीं होता।