उपयोगितावाद (Utilitarianism)

उपयोगितावाद (Utilitarianism)

उपयोगितावाद एक नैतिक सिद्धांत (Ethical Theory) है, जिसके अनुसार कोई कार्य तभी नैतिक रूप से सही माना जाता है जब वह अधिकतम लोगों के लिए अधिकतम सुख (Greatest Happiness of the Greatest Number) उत्पन्न करे।

इस सिद्धांत में किसी कार्य की सही या गलत होने का निर्णय उसके परिणाम (Consequences) के आधार पर किया जाता है।

प्रमुख विचारक

  • Jeremy Bentham
  • John Stuart Mill

जेरेमी बेंथम का दृष्टिकोण

  • सुख (Pleasure) और दुःख (Pain) को नैतिकता का आधार माना।
  • जो कार्य अधिक सुख और कम दुःख पैदा करे, वही सही है।
  • सभी व्यक्तियों के सुख को समान महत्व दिया।

जॉन स्टुअर्ट मिल का दृष्टिकोण

  • बेंथम के सिद्धांत को और विकसित किया।
  • सुख के गुण (Quality) को भी महत्व दिया, केवल मात्रा (Quantity) को नहीं।
  • बौद्धिक और नैतिक सुखों को शारीरिक सुखों से श्रेष्ठ माना।

उदाहरण

यदि किसी निर्णय से 100 लोगों को लाभ होता है और 10 लोगों को थोड़ी असुविधा होती है, तो उपयोगितावाद के अनुसार वह निर्णय नैतिक रूप से उचित माना जा सकता है क्योंकि उससे अधिक लोगों का अधिक कल्याण होता है।

मुख्य विशेषताएँ

  • परिणाम-आधारित नैतिकता (Consequentialism)
  • अधिकतम लोगों का अधिकतम सुख
  • सामाजिक कल्याण पर जोर
  • निर्णय का मूल्यांकन उसके परिणामों से

एक पंक्ति में

उपयोगितावाद वह नैतिक सिद्धांत है जिसके अनुसार सही कार्य वही है जो अधिकतम लोगों के लिए अधिकतम सुख और कल्याण उत्पन्न करे।

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